क्या सिकंदर वास्तव में महान था? उसके भारतीय अभियान के बारे में एक विश्लेषण (Was Alexander really Great? An analysis about his Indian campaign)

बहुत सारे इतिहासकार सिकंदर(Alexander) को महान बताते है| अगर उसके उम्र और उसके साहस को देखा जाए तो यक़ीनन वो महान था| क्यों कि मात्र 33 कि उम्र में उसने जितनी लड़ाईया लड़ी और जितना अपने राज्य का विस्तार किया वो काबिले तारीफ है लेकिन अगर युद्ध के हिसाब से देखा जाए तो उसकी महानता हिंदुस्तान में आ कर ख़त्म हो जाती है| कैसे? चलिए समझते है-

सिकंदर(Alexander) करीब 323 ईसा पूर्व भारत पंहुचा था छोटे मोटे कबीलो के साथ युद्ध जीत कर वो झेलम नदी तक पहुंच गया था| अब अगली लड़ाई उसको पुरुषोत्तम या पुरु(Porus) से होनी थी जो कि पंजाब राज्य में राज करते थे|

एक विश्लेषण पुरुषोत्तम(Porus) के सेना कि-

पैदल सेना- 20,000
घुड़सवार – 2,000
लड़ाकू हाथी- 200

एक विश्लेषण सिकंदर(Alexander) के सेना कि-

पैदल सेना- 40,000
घुड़सवार – 7,000

किसी तरह सिकंदर(Alexander) वो लड़ाई जितने में कामयाब रहा| लेकिन उस लड़ाई में उसकी सेना बहुत भयभीत हो गई थी| उन हाथियों से और पुरु(Porus) कि सेना ने जिस वीरता से लड़ाई लड़ी उससे सिकंदर कि सेना का मनोबल पस्त हो गया था| सिकंदर(Alexander) शायद अकेला व्यक्ति था जो आगे बढ़ना चाहता था| उसके लिए जब वो अपने बहादुर योद्धाओ और पुरु के साथ अगले शत्रु यानि मगध कि सेना का विश्लेषण करने बैठा था तो उसके और उसके योद्धाओ कि रूह काँप गई|

मगध कि सेना का विश्लेषण-

पैदल सेना- 2,00,000
घुड़सवार – 80,000
रथ- 2,000
लड़ाकू हाथी- 3,000

मगध कि सेना कि जानकारी पा कर यूनानियों ने सिकंदर का विद्रोह कर दिया और उसको अपने यात्रा को मजबूरी में रोकना पड़ गया और वापसी का फैसला करना पड़ा| उसके वीर योद्धाओ ने ये समझ लिया था कि अगर आगे गए तो वापस आने का कोई संभावना नहीं था|

सिकंदर(Alexander) कि सेना वापस आने लगी तो रास्ते में उसे मालवा के राजाओ से युद्ध करना पड़ा जहाँ उसको हार का सामना करना पड़ा और वो बुरी तरह से घायल हो गया| किसी तरह बच तो गया लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई| लेकिन ये बात यूनानी लेखकों ने अपने किताब में छुपा दी क्यों कि अगर वे हक़ीकत लिखे होते तो सिकंदर कि सारी महानता धरी कि धरी रह जाती| तब शायद यूनान में उसको वो आदर नहीं मिलता जो आज तक मिलता आ रहा है|

सिकंदर(Alexander) अकेला ही ऐसा योद्धा था जिसके अंदर आगे बढ़ने कि हिम्मत थी और अगर वो आगे बढ़ा भी होता तो भी उसकी महानता मगध में ख़त्म होनी थी| हलाकि उसकी हिम्मत के लिए हम उसको महान तो बोल ही सकते है| लेकिन उसके युद्ध के अनुसार उसको महान बोलना बेमानी होगी|

सिकंदर कि सेना का बुरा हाल देख कर पश्चिमी देश अगले लगभग 1000 सालो तक हिंदुस्तान कि तरफ नज़र उठा कर देखने कि हिम्मत नहीं हुई|

One Reply to “क्या सिकंदर वास्तव में महान था? उसके भारतीय अभियान के बारे में एक विश्लेषण (Was Alexander really Great? An analysis about his Indian campaign)”

  1. पोरुष से सिक्न्दर जीता नहीं था ,वामप्ंथी व अंग्रेजी इतिहासकारों ने इतिहास बदल दिया हे हिन्दुओं की मानसिकता को ग्रसित करने के लिये , उसकी सैना का बुरी दशा पोरुस राजा की सैना ने करदी वह बहुत घायल भी हो गया था बाद में उसका सैनापति सेलियकस उसको निकाल कर ले गया बाद में अपने देश लोटते समय रास्ते में ही दम तोङ दिये , जहां तक उसकी रण में युद्ध नीति थी वो प्रजाओं पर रात में आक्रमण करता था ,सैनिकों व राजाओं से कम लङता था , इसीलिये वह बहुत जगह सफल रहा था ,

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