हिन्दू परंपरा के पीछे विज्ञान। हो सकता है कि आप नहीं जानते इसे जरूर पढ़े (Science Behind Hindu Tradition. Might be you don’t know. Must read it.)

सनातन संस्कृति में ज्यादातर कर्म के वैज्ञानिक आधार है| हम में से कुछ लोग इतना पढ़ लेते है कि अपनी संस्कृति के बारे में पढ़ना भूल जाते और समय-समय पर हिन्दू रीति-रिवाज़ो कि बुराई करते रहते है| आज हम आप को उन्ही रीति-रिवाज़ो कि वैज्ञानिक आधार भी बताएँगे जो बहुत से लोग शायद नहीं जानते है-

1 ) तुलसी का महत्व-

शास्त्रों के अनुसार, तुलसी का पौधा जहाँ होता वहाँ से कई मीटर दुरी कई प्रकार के हानिकारक कीड़े और जीवड़ू नहीं आते है या मौजूद रहते है| इसीलिए तुलसी हर आँगन में लगाने को बताया गया है| हमेशा से तुलसी के लक्ष्मी स्वरूपा होने के कारण चबाकर खाने को निषेध माना गया है। इसके साथ ही वैज्ञानिक तौर पर भी तुलती में आर्सेनिक होने की पुष्टि हुई है जो कि दांतों पर बुरा असर डालती है। इस कारण से तुलसी को हमेशा बिना चबाए खाना ही उत्तम माना गया है। ऐसे ना केवल आप परंपराओं का मान रख पाएंगे बल्कि आपके दांत भी स्वस्थ बने रह सकेंगे।

2 ) सूर्य अर्घ या सूर्य नमस्कार कि विशेषता-

पुरानी मान्यताओं के अनुसार सूर्योदय के समय अर्घ्य देने का विधान इसलिए बताया गया है, क्योंकि इस समय लगभग 45 मिनट तक सूर्य से निकलने वाली किरणें अल्ट्रा वायलेट( पराबैंगनी) रेडिएशन से पूरी से तरह से मुक्त होती हैं। दरअसल इन किरणों से आपके शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होने के साथ ही आपकी ऊर्जा में गजब की वृद्धि होती है। इसी वजह से इस दौरान सूर्य नमस्कार से लेकर प्रदक्षिणा और मंत्र जप की परंपरा चली आ रही है, ताकि हम सूर्योदय की किरणों के संपर्क में अधिक से अधिक रहकर इनसे होते स्वास्थ्य लाभ को ग्रहण कर पाएं।

3 )रत्नों का प्रयोग कराता है इतने लाभ-

प्रकृति की अनमोल देन रत्नों में जहां कई शक्तियां समाहित होती हैं, वहीं ज्योतिषशास्त्र में इनसे संबंधित ग्रहों की ऊर्जा व चुंबकीय शक्ति के प्रभाव को प्राप्त कर लाभान्वित होने की बात मानी गई है। दरअसल रत्नों से होकर गुजरती किरणों से जहां आपको कई तरीके लाभ होते हैं, वहीं इनसे संबंधित ग्रहों के साथ आपका अनुनाद संबंध स्थापित हो जाता है। इससे आपके शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।

4 ) आखिर व्रत रखना क्यों रहता है फायदेमंद-

आयुर्वेद के अनुसार, शरीर को फिर से ऊर्जावान बनाने के लिए एक दिन के लिए विश्राम देना जरूरी होता है, उसी प्रकार से पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने के लिए व्रत आवश्यक माना गया है। दरअसल उपवास करने से हमारे शरीर के एंजाइम सक्रिय बनते हैं। जिससे डायबीटीज, मोटापे जैसी समस्याओं से निजात मिलता है क्योंकि ये बीमारियां सिर्फ एंजाइम प्रणाली के बिगड़ने से ही पैदा होती हैं। इसलिए यदि युवावस्था से ही उपवास की आदत डाल ली जाए तो इस तरह के रोगों से बचा जा सकता है।

5 ) शंख ध्वनि व मंत्रों के उच्चारण से जुड़े लाभ-

हमारे पुराणों में भी पूजा के दौरान मंत्रों के उच्चारण से पैदा होते स्पंदन से होते शारीरिक लाभ की बात स्वीकार्य की गई है। ऐसे जहां आपके व्यक्तित्व का विकास होता है, वहीं बौद्धिक क्षमता में भी अपूर्व वृद्धि होती है। इसके अलावा पुराणों में शंख को माता लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है इसलिए हर मांगलिक कार्य पर शंख ध्वनि का खास महत्व है। इससे जहां आपके आस-पास सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार होता है, वहीं यह नकारात्मक शक्तियों से आपका बचाव करती है। ऐसे शंख के गूंजने पर वातावरण से सारे कीटाणु नष्ट होने के भी वैज्ञानिक साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। इसी के साथ शंख बजाने से दृढ़ इच्छाशक्ति का विकास होने का साथ ही श्वास संबंधी रोगों में राहत मिलती है।

6 ) माथे पर तिलक लगाना क्यों होता शुभ-

हिंदू परंपरा के अनुसार, किसी भी खास मौके के समय माथे पर तिलक लगाना अनिवार्य माना गया है। हालांकि इसका एक वैज्ञानिक कारण यह है कि इससे हमारे माथे के पीयूष ग्रंथियां ( पिट्यूटरी ग्लैंड्स) ऐक्टिव हो जाती हैं। जिससे आपका आलस्य दूर होता है और आपकी स्मरण शक्ति बढ़ती हैं। वहीं आपका दिमाग शांत होने से आपको तनाव से भी मुक्ति मिलती है। आयुर्वेद में भी इस स्थान की नाड़ी का काफी महत्व बताया गया है, इस कारण नियमित रूप से तिलक लगाने से इस नाड़ी मंडल को जागृत बनाकर रखा जाता है। जिससे साइनस व इनसोमनिया जैसे रोग भी दूर होते हैं।

7 ) श्रृंगार ही नहीं आभूषणों से होते ऐसे भी फायदे-

हमारी पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हर सुहागन स्त्री के लिए किसी भी शुभ अवसर या खास पूजा-पाठ में पारंपरिक गहनों से श्रृंगार करने का विधान बड़ा ही शुभ माना गया है। दरअसल इसके कई स्वास्थ्य लाभ होते हैं जैसे चांदी के आभूषणों को पहनने से हाई ब्लड प्रेशर में राहत व हड्डियां मजबूत बनती हैं। इसके अलावा ऐसा माना जाता है कि सोना पहनने से बढ़ती उम्र के असर को कम कर सकते हैं। इसी वजह से कई ब्यूटी प्रॉडक्ट में भी सोने का इस्तेमाल होता है। सोने के एंटी इंफ्लामेट्री गुणों की वजह से आपके रंग-रूप में गजब का निखार आता है।

8 )डायट में गुड़ को करें जरूर शामिल-

गुड़ को शक्कर का सबसे शुद्ध रूप माना जाता है, जिससे रक्त को साफ बनाए रखने की क्षमता का विकास होता है। इस वजह से कई डॉक्टर भी जो लोग साफ-सफाई का काम करते हैं उन्हें खाने में गुड़ लेने की सलाह देते हैं। दरअसल ऐसे संक्रमण फैलाने वाले सारे कीटाणुओं का ना केवल नाश हो जाता है, बल्कि काफी हद तक उनके शरीर में प्रवेश पर भी रोक लग पाती है।

9 )तांबे के बर्तन में रखें पानी से होता ये लाभ-

सदियों से तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने को लंबी आयु का वरदान पाने की पहली शर्त माना गया है। ऐसे इस जल में तांबे के गुण आ जाते हैं और उसके सारे बैक्टीरिया मरते हैं। वहीं यह हमारे लीवर को भी मजबूत बना देता है, जिससे यह पानी सभी के लिए काफी फायदेमंद बन जाता है। ऐसे तांबे का बर्तन ना होने पर हमारे पूर्वज पानी में तांबे के सिक्के डालकर रखने का भी नुस्खा दे गए हैं, जो कि उतना ही लाभप्रद रहता है।

10 ) हवन का महत्व-

हाल ही में कुछ अंतराष्ट्रीय वैज्ञानिको ने हवन पर अनुसन्धान कर रहे थे और उन्होंने पाया कि हवन जिस जगह पर होता है उसके लगभग 100 मीटर के चारो तरफ लगभग 95 % जीवाणु और विषाणु ख़त्म हो जाते है और करीब करीब 1 महीने तक ऐसी परिश्थिति बानी रहती है| ऐसा इस लिए होता है कि जो वस्तुवे हवन में इस्तेमाल होती है उनके रिएक्शन से जो धुवां बनता है वो कई प्रकार के विषाणुओ को ख़त्म कर देता है और किसी जानवर, मनुष्य या कीड़े-मकौड़ो को नुकशान नहीं पहुँचता|

कृपया करके ये सारी जानकारी उन लोगो बताये जो पढाई-लिखाई करके केवल पश्चिमी संस्कृति कि बाते करते है और उनकी आँखे खोलने का प्रयत्न करे|

Ref: Navbharat Times

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