क्या इतिहास खुद को दोहराता है? क्या हमने अभी तक इससे कुछ सीखा है? इतिहास, सनातन, जाति, पद्मावती …(Does History repeat itself? Have we learnt anything yet from it? History,Sanatan,Caste,Padmavati…)

कहा जाता है कि इतिहास या भूतकाल से बड़ा गुरु कोई नहीं होता है मतलब आप जो भी गलतियां करते हो उसी से ज्यादा सीखने को मिलता है या सीखना चाहिए| इसी लिए अनुभव को सबसे बड़ा गुरु बताया गया है| लेकिन क्या सनातन धर्म के लोग इतिहास से कुछ सिख रहे है? क्या हमारे पुरखो ने जो गलतियां कि है उससे हमने कुछ सीखा है?

गलती संख्या 1-

ऐसा लगता तो नहीं है| समाज के कुछ लोगो को छोड़ कर किसी ने कुछ सीखा है| आज भी बहुत दुःख होता है कि सनातन धर्मी अपने इतिहास से कुछ ना सीखा पाए| आज भी सनातन धर्म के अलग अलग समूह के लोग उसी घमंड में जी रहे है जिस घमंड के वजह से हिंदुस्तान में बाहरी आक्रमणकारियों का आगमन हुआ| बात शूरवीर राजा पुरु कि हो रही है जिसका साथ उस समय के मौजूद किसी राजा ने सिकंदर के खिलाप नहीं दिया| अगर दिया होता तो शायद इतिहास आज कुछ और ही होता और ऐसा बस इस लिए हुआ क्यों कि किसी को भी अपने धर्म और संस्कृति कि परवाह ही नहीं थी|

गलती संख्या 2-

चलो वो एक बार गलती हुई और सिकंदर कि सेना मगध जैसे शक्तिशाली राज्य के सामने वापस जाने पर मजबूर हो गए| लेकिन क्या राजा पुरु के हार से हिंदुस्तान के राजाओ ने कुछ सीखा? कुछ नहीं सीखा| महमूद गजनवी (सन 1001 ) का हिंदुस्तान में प्रवेश भी कुछ इसी प्रकार से हुआ| सबसे पहले उसने आनंदपाल को हराया तब सारे हिंदुस्तानी राजा मजे ले रहे थे| उसके बाद उसने एक के बाद एक आनंदपाल, सुखपाला, चन्द्रपाला को हराया| हद तो तब हो गई जब चंदेला गौड़ के खिलाप युद्ध में कन्नौज के राजा ने ग़ज़नी का साथ दिया और चंदेला को हार का मुख देखना पड़ा और इस तरह एक मुस्लिम आक्रमणकारी का हिंदुस्तान कि धरती पर प्रवेश हुआ| ये कहानी यही नहीं ख़त्म होती है कहते है ना अगर आप अपने इतिहास से कुछ ना सीखते है तो वो अपने आप को दोहराता है| आगे के कहानी में यही हुआ|

गलती संख्या 3-

इतिहास में वो गलती तीसरी बार दोहराई गई और इस बार ये कहानी हुई दूसरे शूरवीर राजा पृथ्वीराज चौहान के साथ हुआ| यहाँ पृथ्वीराज़ के साथ साथ हिंदुस्तान के राजाओ कि भी गलती थी| पृथ्वीराज कि गलती थी कि उसने 16 बार गोरी को छोड़ दिया और हिंदुस्तान के राजाओ कि गलती थी कि अगर वे पृथ्वीराज का साथ दिए होते तो शायद ना तो मोहम्मद गौरी(सन 1191 ) जीता होता और ना तो कोई और मुस्लिम आक्रमणकारी भविष्य में हिंदुस्तान कि तरफ आँख उठा के देखता| लेकिन हुआ ठिक उल्टा उन्होंने अपने इतिहास से कुछ ना सीखा और उल्टा जयचंद मोहम्मद गौरी से जा मिला| वो कहावत है ना “घर का भेदी लंका ढाये”| फिर तो ये होना ही था इस तरह एक और मुस्लिम आक्रमणकारी का हिंदुस्तान में प्रवेश हो गया|

इस तरह विदेशियों का हिंदुस्तान में प्रवेश हो गया लेकिन इन् सब में एक बात को तो साफ़ दिख रही है कि किसी हिंदुस्तानी ने धोखा दिया और हिंदुस्तानी राजाओ के बिच में बाहरियों के खिलाप कोई एकता नहीं थी| और ये कहानी अंग्रेजो तक जारी रही| अंग्रेज़ो का तो नारा ही यही था “फुट डालो और राज़ करो” और उन्होंने किया|

आज के हिंदुस्तान में भी यही हो रहा है सनातन धर्म के साथ गद्दारी सनातन धर्म के ही नेता अपने-अपने स्वार्थ के लिए सनातन धर्म को कई जातियों में बांटते जा रहे और बेचारे मासूम सनातन धर्मी आने वाले सुनामी को देख भी नहीं पा रहे है|जब देखो तब ये उस जाती का है ये उस जाती का है और इस तरह देखा जाए तो हिन्दुओ को जाती के नाम पर कई दुकड़ो में तोड़ दिया गया है| और बेचारे हिन्दू वही इतिहास दोहराने को तत्पर पर है कि ये मसला तो उस जाती का हमे क्या मतलब है? अरे भाई जब कोई महामारी पडोसी को होता है तो धीरे-धीरे वो पूरे क्षेत्र को अपने कब्ज़े में ले लेता और सब लोग देखते रह जाते है| कहने का मतलब ये है कि अभी भी वक़्त है सनातन धर्म के वंशजो जाग जाओ|उन महामारियों (नेता, बॉलीवुड, जाती इत्यादि) को पहचानने कि जरुरत है| साथ ही साथ आज “पद्मावती” फिल्म केवल और केवल राजपूतो से जुड़ा मुद्दा नहीं है ये पूरे सनातन धर्मियो से जुड़ा मुद्दा है अगर आज इक्कट्ठा ना हुए तो कल को ये किसी और जाती के ऊपर गलत फिल्म बनाएंगे और दूसरे जाती वाले सोचते रह जाएंगे| धीरे-धीरे ये सारे सनातन धर्मियो के लिए बहुत बुरा होता और शायद बाद में इतना देर हो जाए कि एकता होते हुए भी सनातन धर्म को कुचल दिया जाए जैसे 1857 कि क्रांति के साथ हुआ| एकता तो हिन्दुस्तानियो के बिच जगी लेकिन काफी देर हो चुकी थी और सभी क्रांतिकारियों को शहीद होना पड़ा| इतना देर मर करो|

जागो हिन्दू जागो!

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