गुजरात चुनाव 2017 के बारे में एक गहरा विश्लेषण और इसका 2019 लोकसभा चुनाव पर प्रभाव (A deep analysis about Gujarat Election 2017 and it’s effect on 2019 Lok Sabha election)

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गुजरात चुनाव 2017 का बहुत महत्व है| वैसे देखा जाए तो इसमें 2019 के लोक सभा चुनाव का भविष्य भी छुपा है| हालाँकि भाजपा के लिए ये जीत सीटों के हिसाब से 2012 और 2007 के चुनाव से छोटी है लेकिन अगर इसके कई पहलुओं के देखा जाए तो भाजपा के लिए ये बहुत बड़ी जीत है| शायद इस चुनाव ने 2019 का भविष्य तय कर दिया है| आइये इस चुनाव के अलग-अलग पहलुओं का विश्लेषण करते है|

1 ) वोट प्रतिशत

2012 के चुनाव में भाजपा को 47.85 प्रतिशत वोट शेयर मिला था जबकि इस बार सीट्स भले कम आये है लेकिन वोट प्रतिशत लगभग 2.35 प्रतिशत बढ़ा है| जो कि भाजपा को और मजबूत बनाती है|
वही अगर कांग्रेस को देखा जाए तो उसका वोट प्रतिशत भी बढ़ा है| 2012 में 38.93 प्रतिशत वोट शेयर मिला जबकि इस बार ये लगभग ५ प्रतिशत है और 43.9 प्रतिशत मिला है जिसको लेकर कांग्रेस जरूर खुश हो सकती है| लेकिन उसके लिए ये एक खतरा भी है कैसे? वो आगे बताते है|

2 ) हार्दिक पटेल, जिग्नेश मेवाणी, अल्पेश ठाकुर और भारतीय ट्राइबल पार्टी(BTP) के साथ कांग्रेस का गठबंधन

हार्दिक पटेल जो कि हालिया समय में पाटीदारो का बहुत बड़ा नेता बन के उभरा है वो 12 % पटेलों यानि गुजरातियों का अगुवाई कर रहा था वही जिग्नेश मेवानी 7% गुजराती दलितों का नेता है| अल्पेश ठाकोर 20 % कोलिस और ठाकोर का बहुत बड़ा नेता है| वही BTP लगभग 15% आदिवासियों कि बहुत मजबूत पार्टी है| अगर सभी को जोड़ा जाए तो ये गठबंधन 54 % गुजराती आबादी कि अगुवाई करते है| उसके बावजूद कांग्रेस को असफलता मिलना और भाजपा कि जीत ये दर्शाती है कि कांग्रेस कितनी बुरी तरह से इस चुनाव में बिफल रही है| लेकिन अभी बहुत सारे विशेषज्ञों लगता है कि भाजपा के लिए ये खतरे कि घंटी है? ये समझ से परे है|

3 ) पाटीदार आंदोलन

अगर केवल पाटीदारो कि बात कि जाए तो इतना पड़े व्यापक आंदोलन के बाद भी अगर पटेलों के तरफ से हार्दिक को भरपूर सहयोग नहीं मिला तो कही न कही ये कांग्रेस कि बहुत बड़ी असफलता है| कम से कम कांग्रेस को 70% से ज्यादा पटेलों का वोट मिलना चाहिए था| हालाँकि अभी तक पता तो नहीं चल पाया है कि पटेलों का कितना प्रतिशत वोट कांग्रेस को मिला है| लेकिन अगर परिणाम को देखा जाए तो ऐसा प्रतीत नहीं होता कि कांग्रेस 50 % से ज्यादा वोट पाने में सफल हुई है|

4 ) राहुल और मोदी के प्रचार प्रभाव

बहुत लोग ऐसा मान रहे है कि राहुल कि छवि गुजरात चुनाव के बाद बदली है लेकिन ये कही से भी नहीं लगता| अगर राहुल कि छवि बदली होती तो कांग्रेस को ये चुनाव जितना चाहिए था| इसके उलट ज्यादातर लोग मान रहे है कि मोदी के प्रचार के बाद काफी लोगो ने भाजपा को वोट दिया जो नहीं देना चाहते थे| इससे ये पता चलता है कि मोदी का प्रचार करने कि छमता अभी भी किसी भी बिपक्षी पार्टी के नेता से कही ज्यादा है| मोदी के अंदर अभी भी वो छमता उसी प्रकार कि है जो 2014 के चुनाव के समय थी| वही जो लोग कांग्रेस के सीट्स में बढ़ोतरी के लिए राहुल के व्यक्तित्व को सराह रहे है वो शायद गलत है| हाँ ये जरूर है कि अगर राहुल ने अपने विचार से आगे बढ़ कर हार्दिक,जिग्नेश, अल्पेश और BTP के साथ गठबंधन किया है तो जरूर उसकी सराहना करनी चाहिए| यहाँ राहुल और कांग्रेस को जरूर सफल माना जाना चाहिए|

5 ) मोदी बनाम विपक्ष

अभी भी कोई भी राज्य या राष्ट्रीय अस्तर का चुनाव मोदी बनाम विपक्ष ही चल रहा है| इसका साफ़ मतलब है कि अभी भी मोदी अकेले ही सभी राष्ट्रीय नेताओ पर भारी है| अगर विपक्ष अभी भी समझ रहा है कि 2019 का चुनाव वो भाजपा या NDA से लड़ेगी तो वो गलत है| 2019 का चुनाव भी मोदी बनाम विपक्ष ही होगा और अभी तक के परिस्थिति के अनुसार मोदी बहुत मजबूत है| विपक्ष को किसी ऐसे नेता कि जरुरत है जिसका छवि मोदी से मिलता जुलता हो| राहुल शायद इस लिस्ट में मेरे अनुसार नहीं आते|

6 ) भाजपा के 22 साल कि गुजरात में सत्ता बनाम विरोधी लहर

भाजपा के 22 साल के शासन के बावजूद अगर गुजरात चुनाव में विरोधी लहर इतनी कमजोर दिखी जो कि भाजपा को हरा नहीं पाए यद्यपि वोट शेयर में इज़ाफ़ा हो गया| इसका मतलब है कि विपक्ष अभी भी इतनी कमजोर है कि वो 2019 का चुनाव जितने कि सपना भी नहीं देख सकती| कोई भी एक पार्टी अगर इतने सालो तक एक जगह राज किया और उसके बावजूद उसके खिलाप मुद्दों में मजबूती नहीं होना ये विपक्ष के लिए खतरे कि घंटी से कम नहीं है|

इस विश्लेषण के बाद मैं एक ही बात कह सकता हूँ कि अगर विपक्ष 2019 में अपने आप को चुनाव में देखना चाहता है तो कांग्रेस में एक बहुत बड़े बदलाव कि जरुरत है जिसकी आशा राहुल के ताजपोशी होती ही ख़त्म हो गई|

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