विश्व प्रसिद्ध भारतीय इंजीनियरिंग “वुट्ज़ स्टील” के बारे में जानकारी और इसका सिकंदर और पोरस युद्ध से संबंध (A knowledge about World famous Indian Engineering “Wootz Steel” and it’s relation to Alexander and Porus battle)

वैसे तो हिंदुस्तान ने दुनिया को बहुत कुछ दिया है लेकिन हम आज आपको एक ऐसे इंजीनियरिंग ज्ञान के बारे में बताने जा रहे है जो शायद हिंदुस्तान के बहुत कम लोग जानते है| और इस ज्ञान को जान कर आप सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि हिंदुस्तान कि ऐतिहासिक विद्या कितनी अव्वल दर्ज़े कि थी| लेकिन हमारे इतिहासकारो के कमजोरी के वजह से ना जाने कितनी विद्याये हिंदुस्तानी लोग आज भी नहीं जानते है|

ये ज्ञान है स्टील के बारे में| वैसे तो आधुनिक वैज्ञानिको कि माने तो स्टील कि खोज 4000 BC में हुआ था लेकिन इसका असल में इस्तेमाल औज़ार, बर्तन और हथियार बनाने में 600 BC में हिंदुस्तान में हुआ था| सबसे पहले स्टील के बारे में जान लेते है-

“लोहे और कार्बन को लगभग 1200 डिग्री सेल्सियस तक पिघला कर स्टील को बनाया जाता है जो कि सामान्य लोहे से कई गुना मजबूत और हल्का होता है”

वैज्ञानिको ने पाया कि स्टील का प्रयोग औज़ार और हथियार बनाने में सर्व प्रथम हिंदुस्तान में 600 ईसा पूर्व में हुआ था और उसका सबूत दक्षिण भारत में कोडुमानल(तमिलनाडु) नमक स्थान पर पाया गया| जहाँ लोहे और कार्बन को लगभग 1200 डिग्री सेल्सियस पर माइक्रो लेबल पर मिला कर उच्च कोटि हथियार बनाये जाते थे जो कि सामान्य हथियारों से कई गुना मजबूत और हल्के होते थे| बेंजामिन हेयने(Benjamin Heyne ) ने लगभग 1800 ईस्वी में सर्वप्रथम इस रहस्य को दुनिया के सामने रखा था और उस स्टील को बात में वुट्ज स्टील(Wootz स्टील) कहा जाने लगा|

वुट्ज स्टील से सम्बंधित एक सच्ची कहानी और युद्ध के बारे में बताता हूँ जिस युद्ध में हिंदुस्तान के एक वीर ने महान कहे जाने वाले विदेशी योद्धा को नाको चने चबाने पर मजबूर कर दिया|

वुट्ज स्टील से बने तलवार का देन था कि पुरु का सिकंदर कि सेना हिला भी नहीं पाई और अगर आधुनिक इतिहासकारो कि माने तो पुरु युद्ध हारने तक आखिरी योद्धा जो लड़ता रहा क्यों कि उसके तलवार के सामने कोई भी यूनानी टिक नहीं पा रहा था| युद्ध के बाद जब सिकंदर पुरु के साथ बैठा तो उसने खजाने कि जगह उस के तलवार के बारे में पूछा और कई सारे वुट्ज स्टील से बने हथियार उसकी सेना यूनान ले गई|

बाद में वुट्ज के बने हथियारों को पाने के लिए दुनिया भर से व्यापारी हिंदुस्तान आये और धीरे – धीरे पुरे यूरोप और मध्य एशिया के राज्यों तक पहुंच गया| बाद में इसी स्टील को दमासकस स्टील (Damascus Steel ) भी कहा जाने लगा क्यों कि पश्चिमी सभ्यता के लोग हिंदुस्तानी ज्ञान कि हमेशा कॉपी करते थे और अपना नाम दे देते थे|

इसी स्टील को एक बहुत ही प्रसिद्ध अंग्रेजी शो गेम ऑफ़ थ्रोन्स(Game of Thrones ) में वेलेरियन स्टील के नाम से प्रयोग किया गया|

2 Replies to “विश्व प्रसिद्ध भारतीय इंजीनियरिंग “वुट्ज़ स्टील” के बारे में जानकारी और इसका सिकंदर और पोरस युद्ध से संबंध (A knowledge about World famous Indian Engineering “Wootz Steel” and it’s relation to Alexander and Porus battle)”

  1. यह विल्कुल गलत हे के राजा पोरस सिकन्दर से हार गये थे , वामपंथी व अंग्रेजी व मुस्लिम इतिहासकारों ने पूरा उल्टा इतिहास लिख दिया भारतीय हिन्दुओं की मानसिकता को बदलने के लिये , सिकन्दर ,पोरस से युदध हार कर ,भागरहा था , अपने देश लोट रहा था ओर सैनिको ने भी विद्रोह कपना आरम्भ किया रास्ते में ही दम तोङ दिया घावों के कारण

    1. अगर हम इतिहासकारो को गलत भी मान ले तो चाणक्य और चन्द्रगुप्त के समय में सेल्यूकस का पोरस कि धरती पर राज़ करना ये सिद्ध करता है कि सिकंदर किसी तरह वो लड़ाई जीत गया था| उसकी सेना ने विद्रोह क्यों किया ये भी मैं अपने जल्द ही अपने पोस्ट में बताऊंगा| क्यों कि ये भी बहुत रोमांचक कहानी है जिसको बहुत कम लोग जानते है|

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